| क्रम सं |
स्थान |
टिप्पणी |
| 1 |
महाप्रबंधक का कार्यालय(ओल्ड बिल्डिंग) |
प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है। टीडीसी 31.12.2015 |
| 2 |
मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय,मुंबई सेंट्रल |
| 3 |
मुंबई सेंट्रल स्टेशन |
| 4 |
बांद्रा टर्मिनस स्टेशन |
| 5 |
जगजीवन राम अस्पताल |
| 6 |
लोअर परेल कारखाना |
| 7 |
एमईएमयू शेड,वड़ोदरा |
| 8 |
प्रतापनगर कारखाना |
| 9 |
मंडल रेल प्रबंधक, रतलाम |
| 10 |
मंडल चिकित्सालय,रतलाम |
| 11 |
इंदौर स्टेशन |
| 12 |
डीजल शेड, रतलाम |
| 13 |
मंरेप्र कार्यालय, अहमदाबाद |
| 14 |
मंडल चिकित्सालय, साबरमती |
| 15 |
अहमदाबाद स्टेशन |
| 16 |
मेहसाणा स्टेशन |
| 17 |
डीजल शेड, वटवा |
मई-2015 में ऊर्जा लेखा परीक्षा पूरा कर लिया गया। अनुशंसाओं को क्रियान्वित किया जा रहा है। |
| 18 |
मंरेप्र कार्यालय, राजकोट |
प्रस्ताव प्रक्रियाधीन। टीडीसी 31.12.2015 |
| 19 |
मंडल चिकित्सालय, राजकोट |
| 20 |
राजकोट स्टेशन |
| 21 |
हापा यार्ड |
| 22 |
मंडल चिकित्सालय, भावनगर |
ऊर्जा लेखा परीक्षा अगस्त-2015 में पूरी की गई। अनुशंसाओं का अध्धयन किया जा रहा है। |
| 23 |
महालक्ष्मी कारखाना |
प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है। टीडीसी 31.12.2015 |
| 24 |
लेडी जैक्सन चिकित्सालय,दाहोद. |
| 25 |
ईएमयू कारशेड,मुंबई सेंट्रल,कांदीवली,विरार |
| शेड/ कारखाना |
बड़ौदा |
बीएल |
दाहोद |
| ऊर्जा लेखा परीक्षा |
नवंबर 2012 |
जुलाई 2013 |
जून – 2008 |
| ISO 50001 |
व.मं.वि.इंजी./पी द्वारा किया जा रहा है। निविदा 06.10.15 को देय है। |
प्राप्त की गई |
विस्तृत प्राक्कलन की विधीक्षा की गई निविदा आमंत्रित की जा रही है।
|
कर्षण सबस्टेशनों की ऊर्जा लेखापरीक्षा:
वर्ष-2007 में मेसर्स ईआरडीए द्वारा एमपीआर टीएसएस की ऊर्जा लेखा परीक्षा की गई। मेसर्स ईआरडीए की संस्तुतियों के अनुसार, पावर फैक्टर को 0.98 और उससे ऊपर तक बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त कैपेसिटर बैंक की व्यवस्था की गई है। इससे रेलवे का पावर फैक्टर इंसेंटिव 58.71 लाख रू. प्रति वर्ष रहा ।
इसी प्रकार, भेस्टान टीएसएस का र्जा लेखा परीक्षा भी वर्ष 2007 में उपमुख्य.वि.इंजी./टीआरडी/सीसीजी( ऊर्जा लेखा परीक्षक) किया गया और संसतुतियों को क्रियान्वित भी किया गया तथा 40 लाख रू. की प्रतिवर्ष बचत की गई क्योंकि पीएफ इंसेंटिव रेलवे द्वारा प्राप्त किया जा रहा है।
ऊर्जा संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए रेलवे अपने सभी टीएसएस में हर तरह की कार्रवाई कर रहा है। हालांकि, बीईई –ऊर्जा संरक्षण ब्यूरो की महत्वपूर्ण आवश्यकता के सारांश के अनुसार- ईडी(ईएम)-ऊर्जा लेखा परीक्षा विनियम-2010 के संचलन हेतु समय और अंतराल, चर्चा के दौरान महानिदेशक/बीईई को बता दिए गए हैं कि ट्रैक्शन सबस्टेशन की लेखा परीक्षा आवश्यक नहीं है।
इसे देखते हुए किसी टीएसएस की कोई लेखा परीक्षा अब नहीं की जा रही है।
भवनों का आईएसओ 50001 और संस्थापन:
भारतीय रेल में पहली बार– राजकोट, मुंबई सेंट्रल, भावनगर पारा, अहमदाबाद, विद्युत लोकोशेड, वलसाड और एसटी स्टेशन के मंडल रेल प्रबंधक कार्यालयों के लिए ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली के लिए आईएसओ 50001 प्राप्त किया गया है। 20 अन्य लोकेशनों के लिए आईएसओ 50001 प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव पाइपलाइन में हैं(विचाराधीन हैं)
iv) सीएमएस के माध्यम से थ्री फेज़ विद्युत लोकोमोटिव पर ऊर्जा उत्पादन की कर्षण और गैर-कर्षण ऊर्जा मॉनीटरिंग में बचत के लिए की जाने वाली पहल।
प्रौद्योगिक उन्नति और कुशल स्विचिंग उपकरणों की उपलब्धता के साथ,रिजेनरेटिव ब्रेकिंग 3 फेज़ जीटीओ लोको के साथ
डिजाइन में आ गया है। सीएमएस के माध्यम से साइनिंग ऑफ के समय ऊर्जा और ट्रेन लोड रीडिंग की एंट्री के लिए सभी
लोको पाइलट/सहायक लोको पाइलटों को परामर्श देने हेतु 15 अगस्त को एक हफ्ते का अभियान चलाया गया ।
इन आकंडों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि किसी खास सेक्शन में और लदानवार मानदंड सुनिश्चित किया जा सके। अभियान के दौरान लोको पाइलटों को 3 फेज़ लोको में रिजेनरेशन को बेहतर बनाने के लिए रिजेनरेटिव ब्रेकिंग के कुशल प्रयोग और कोस्टिंग के दौरान ऊर्जा संरक्षण हेतु प्रोत्साहित और अभिप्रेरित किया गया।
पश्चिम रेलवे पर कई तरह की हरित क्रांति पहल के माध्यम से गैर-कर्षण में बचत की गई, जैसे- स्टेशनों पर सौर शक्ति प्रणालियों का प्रावधान, समपार फाटक, स्टेशनों, कॉलोनियों में सौर स्ट्रीट लाइटों का प्रावधान, पारंपरिक ऊर्जा संरक्षण उपायों जैसे- स्टेशनों पर एलईडी फिटिंग्स का प्रावधान, ऊर्जा संरक्षित लाइट फिटिंग्स का प्रावधान, पंपों का ऑटोमेशन, स्टार रेटेड उपकरणों का प्रावधान, सिग्नलिंग सिस्टम के द्वारा प्लेटफॉर्मों पर 70% लाइटिंग सर्किट के ऑटोमेशन आदि।
v) ऊर्जा उपयोग में सुधार लाने के लिए डिजाइन को बेहतर बनाने के लिए की गई पहल
1. मुंबई उपनगरीय सेक्शन में 1500 वाट डी.सी को 25 केवी एसी सिस्टम में कई चरणों में किया गया जो कि उपनगरीय यातायात और मौजूदा पुराने पुलों के नीचे ओएचई क्लियरेंस को देखते हुए लगभग असंभव कार्य था। 1500 वाट डी.सी को 25 केवी एसी सिस्टम के कन्वर्जन का कार्य दिनांक 05.02.2012 को पूरा कर लिया गया।
25 केवी एसी के साथ, सिस्टम में ऊर्जा ह्रास में काफी कमी आई है और ईएमयू और लोको में 3 फेज़ तकनीक सहित जेनरेशन संभव हुआ है। 2013-14 से ईएमयू द्वारा खपत की गई ऊर्जा का लगभग 30% रिजेनरेशन द्वारा सिस्टम में फीडबैक दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2014-15 में 82.56 एमयू ऊर्जा की बचत की गई जिसकी कीमत सगभग 65.39 रू. है।
2. सिस्टम में नुकसान को कम करने के लिए अन्य पहल:
- ओलीवर-जी उपस्कर द्वारा आवधिक करंट कलेक्शन जांच की जा रही है और दुष्कर खराबियों को तत्काल दूर किया जा रहा है जिससे ओएचई और पैंटो पैन के बीच कोई चिंगारी न निकले।
- ओएचई में हॉट स्पॉट का पता लगाने और उसे समय पर ठीक करने के लिए के लिए रूफ माउंटेड थर्मल इमेजिंग कैमरा द्वारा ओएचई की जांच करना जिससे न केवल संभाव्य खराबियों से बचा जा सके बल्कि ऊर्जा हानि को भी रोका जा सके। उपस्कर अत्यधिक गर्म हो जाने की घटना से बचने के लिए स्विचिंग स्टेसनों और कर्षण उपकेंद्रों में भी इसी प्रकार जांचें की जा रही है।
- पहले उप सेक्टर में फीडिंग छोर से आइसोलेटरों पर 105 वर्ग मिमी जंपरों से बदला जा रहा है।
- 1250 एम्पियर क्षमता वाले आइसोलेटरों के स्थान पर 1600 एंपियर क्षमता वाले आइसोलेटरों की व्यवस्था की जा रही है।
3. सिग्नलिंग सिस्टम द्वारा प्लेटफॉर्म पर 70% लाइटिंग सर्किट का ऑटोमेशन
vi) & xi) ट्रैक्शन और गैर-कर्षण क्षेत्रों में एसईसी में सुधार
कर्षण क्षेत्र में सुधार
| एसईसी |
लक्ष्य 2015-16 |
माह के दौरान उपलब्धियां (जुलाई) |
वर्ष के दौरान संचयी (अप्रैल-जुलाई) |
% सुधार(संचयी) |
| 2014-15 |
2015-16 |
2014-15 |
2015-16 |
| माल |
6.21 |
6.79 |
7.86 |
6.33 |
7.50 |
- 18.48 |
| यात्री |
19.70 |
19.67 |
19.73 |
19.65 |
19.70 |
- 0.25 |
गैर-कर्षण क्षेत्र में सुधार
पश्चिम रेलवे की वर्षवार खपत और एसईसी(गैर-कर्षण) निम्नलिखित है:
| वर्ष |
गैर-कर्षण प्रयोजन |
एसईसी (किलोवाटघं/किलोवाट) |
| 2010-11 |
1220.02 |
70.45 |
| 2011-12 |
1157.34 |
70.08 |
| 2012-13 |
1112.98 |
65.50 |
| 2013-14 |
1111.81 |
63.32 |
| 2014-15 |
1101.10 |
61.56 |
(vii) मांग पक्ष प्रबंधन/भवन प्रबंधन प्रणाली
(क) प्रत्येक कर्षण सबस्टेशन की संविदा मांग प्रति लोड पैटर्न के अनुकूल रखी जाती है जिससे डीआईएससीओएम को कोई दंड प्रभार न देना पड़े। इसके लिए, मंडल द्वारा संविदा मांग की अर्धवार्षिक समीक्षा की जाती है और तदनुसार प्रधान कार्यालय द्वारा अनुमोदन दिया जाता है।
(ख) पश्चिम रेलवे के निम्नलिखित भवनों को बीईई द्वारा स्टार रेटिंग की गई है।:
- मुंबई सेंट्रल का मं.रे.प्र. कार्यालय – 5 स्टार रेटिंग
- वड़ोदरा का मं.रे.प्र. कार्यालय- 5 स्टार रेटिंग
- रतलाम का मं.रे.प्र.कार्यालय-5 स्टार रेटिंग
- अहमदाबाद का मं.रे.प्र.कार्यालय-5 स्टार रेटिंग
- राजकोट का मं.रे.प्र. कार्यालय-5 स्टार रेटिंग
- भावनगर का मं.रे.प्र.कार्यालय-3 स्टार रेटिंग
(ग) भारतीय रेल पर पहली बार मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय/राजकोट , मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय/भावनगर, मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय – भावनगर पारा, मंडल रेल प्रबंधक/अहमदाबाद, विद्युत लोको शेड-बीएल और एसटी स्टेशन के लिए से ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली के लिए आईएसओ प्राप्त कर लिया गया है। 20 अन्य लोकेशनों के लिए आईएसओ 50001 प्राप्त करने का प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है।
viii) विद्युत लोको/ड्राइविंग तकनीक में ऊर्जा संरक्षण
खपत की गई ऊर्जा और रिजेनरेशन डेटा सीएमएस में एलपी द्वारा फीड किए गए हैं। किसी खास सेक्शन में और लदानवार मानदंड सुनिश्चित करने के लिए इन डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। ऐसे अकुशल ड्राइवरों ,जिनका रिजेनरेशन कम है और ऊर्जा खपत ज्यादा है ,उनमें सुधार हेतु नियमित काउंसलिंग की जा रही है।
xi) सामान्य पावर आपूर्ति में ऊर्जा संरक्षण.
उपरोक्त के अनुसार
x) रेलवे कोचों पर सौर पैनल
साइंस एक्सप्रेस के 2 कोचों पर सौर पैनल लगाए गए हैं
xii) 3 फेज़ लोकोमोटिव में रिजेनरेटिव ब्रेकिंग के कारण बचत:
विद्युत लोकोमोटिव के लिए 3 फेज़ तकनीक अपनाने के कारण ऊर्जा खपत में विशेष सुधार हुआ है जिसने ऊर्जा खपत का 15 से 17% रिजेनरेशन आसान कर दिया है। वर्तमान में, औसतन 42 3-फेज़ लोको प्रति दिन अर्थात् कुल कटौती समय का 22% पश्चिम रेलवे पर गाड़ी परिचालन के लिए उपलब्ध है।जेडईटीसी/बड़ौदा पर सिमुलेटर का प्रयोग करते हुए ड्राइविंग तकनीक को सुधारने के लिए नियमित रूप से ड्राइवरों की काउंसलिंग की जा रही है। अप्रैल-15 से जुलाई-15 के दौरान अनुमानतः 6.71 मिलियन यूनिट रिजेनरेट की गई जिसके परिणामस्वरूप लगभग 4.90 करोड़ की बचत की गई।
xiii) स्टार रेटेड उपकरणों का प्रयोग
पश्चिम रेलवे पर स्टार रेटेड उपकरण जैसे- ऊर्जा सक्षम सबमर्सिबल पंप,सीलिंग फैन,एयर कंडीशनर,रेफ्रिजरेटर, आदि की व्यवस्था की जा रही है।पश्चिम रेलवे पर पिछले 5 वर्षों में खरीदे गए उपकरणों का विवरण निम्नलिखित है:
| वर्ष |
स्टार रेटेड उपकरण |
| 2010-11 |
564 |
| 2011-12 |
733 |
| 2012-13 |
742 |
| 2013-14 |
896 |
| 2014-15 |
733 |
xiv) रेल परिसर में एलईडी का प्रयोग
- भारतीय रेल में पहली बार सीएसआर पहल के अंतर्गत मेसर्स सिस्का एलईडी द्वारा पूरे मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर एलईडी लाइटों का प्रावधान किया गया है।
- पश्चिम रेलवे के अन्य 8 स्टेशनों पर (बिलीमोरा, कोठाज, ओड, मकरपुरा,बमामा, बरजथी, साबरमती एवं पालनपुर) एलईडी लाइटिंग की व्यवस्था की गई।
- पश्चिम रेलवे पर 6538 सं. को बदले जाने हेतु आइडेंटिफाई किया गया है। अब तक निम्नलिखित को बदला जा चुका है:
- मुंबई सेंट्रल मंडल में 820
- बड़ौदा मंडल में 106
- अहमदाबाद मंडल में 37
xv) डीईएलपी योजना के अंतर्गत खरीदे गए एलईडी लैंपों की स्थिति
विद्युत मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम के संयुक्त उद्यम से विद्युत मंत्रालय,मेसर्स एनर्जी एफिशिएंसी सर्विस लिमिटेड(ईईएसएल) के जरिए घरेलू संरक्षण लाइटिंग कार्यक्रम (डीईएलपी) योजना के अंतर्गत लोगों को 7 वाट के ऊर्जा संरक्षित एलईडी बल्ब के वितरण की सुविधा मुहैया करा रहा है और यह लाभ रेल कर्मचारियों को को देने के लिए इसकी कीमत केवल 100/- रखी गई है (जबकि इसी बव्ब की बाजार में कीमक 250-300 रू. है) ईईएसएल वैध पहचान पत्र रखने वाले प्रत्येक कर्मचारी को 10 एलईडी बव्ब 100/- की कीमत के हिसाब से देगा।
महाप्रबंधक/पश्चिम रेलवे द्वारा दिनांक 11.09.2015 को पश्चिम रेलवे पर इस योजना का शुभारंभ किया गया। पश्चिम रेलवे पर अब तक 15251 एलईडी बल्ब वितरित किए जा चुके हैं।
मद सं. xvi) डीसी/एसी कन्वर्जन
मुंबई उपनगरीय सेक्शन में 1500 वाट डी.सी को 25 केवी एसी सिस्टम में कई चरणों में किया गया जो कि उपनगरीय यातायात और मौजूदा पुराने पुलों के नीचे ओएचई क्लियरेंस को देखते हुए लगभग असंभव कार्य था। 1500 वाट डी.सी को 25 केवी एसी सिस्टम के कन्वर्जन का कार्य दिनांक 05.02.2012 को पूरा कर लिया गया।
उत्तर पश्चिम रेलवे
- जयपुर मंडल में यूएनडीपी परियोजना के अंतर्गत जीएसएम/जीपीआरस के माध्यम से पंपिंग इंस्टालेशन का ऑटोमेशन और रिमोट कंट्रोल।
- 90/60 वाट के सीलिंग फैन के स्थान पर 30 वाट के सीलिंग फैन का प्रयोग।
- टी-5/टी8इफएल ट्यूब के स्थान पर एलईडी लाइटों का प्रयोग
- कोचों में ऊर्जा संरक्षिक एलईडी प्रकाशपंजों का प्रयोग।
- 40 वाट के पारंपरिक प्रकार के लैंप के स्थान पर 5 वाट के एलईडी आधारित टेल लैंप का प्रयोग
- 15 वाट के पारंपरिक प्रकार के लैंप के स्थान पर एलईडी आधारित लाइट लाइट –सह- बर्थ संकेतक लाइटों का प्रयोग।
- 18 वाट के फ्लोरेसेंट ट्यूब लाइटों के स्थान पर 11 वाट के सीएफएल फिटिंग्स का प्रयोग।
- वातानुकूलित ईओजी कोचों में ईंधन खपत के लिए कैपेसिटर बैंक लगाए जा रहै हैं।
- ई-बीम कोच वायरिंग के लिए केबल के प्रयोग किया जा रहा है।
- रिजेनरेटिव प्रकार की बैट्री चार्जर, डाइना ड्राइव मशीन , आल्टीमेटर और आरआरयू/ईआरआरयू टेस्टिंग बेंच कारखानों और कोचिंग डिपो में इंस्टाल कर दी गई है।
- सिक लाइन में पावर कार के बिना ईओजी कोचों की टेस्टिंग के लिए जयपुर,बीकानेर और जोधपुर में टेस्टिंग गैजेट लगा दिए गए हैं।
अजमेर रेलवे स्टेशन (उत्तर पश्चिमी रेलवे) में एलईडी लाइट्स के साथ उच्च मास्ट प्रकाश टावर्स